अयोध्या ब्रेकिंग मोदी ने किया राम मंदिर जन्मभूमि का भूमि पूजन
अयोध्या प्रधानमंत्री के हाथों राममंदिर के भूमिपूजन के साथ ही रामलला के नए युग का भी आगाज हुआ। उन्होंने राममंदिर के भूमि पूजन के साथ ही असंख्य बलिदानियों के स्वप्नों को भी मूर्त रूप देने की नींव रखी है। राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए 77 युद्धों का दावा किया जाता है। भगवान की जन्मभूमि पर फिर से राममंदिर की कल्पना पूर्व में अकल्पनीय हो गई थी, लेकिन समय ने करवट ली और वह कल्पना अब साकार हो रही है।
राम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष तो करीब पांच सौ वर्ष पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन कोर्ट की चौखट पर यह मामला 1885 में पहुंचा। निर्मोही अखाड़ा के महंत रघुवर दास ने स्थानीय सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपील दायर की कि विवादित परिसर से लगे रामचबूतरा पर उन्हें मंदिर निर्माण की इजाजत दी जाए। यहीं से इस मामले का अदालती सफर शुरू हुआ। हालांकि मंदिर-मस्जिद विवाद 1528 में ही सामने आया। मान्यता के अनुसार मुगल शासक बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने राम जन्मभूमि पर बने मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया। इसके बाद से ही राम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष शुरू हो गया। माना जाता है कि देश की आजादी के बाद यह संघर्ष और तीव्र हो गया।
1984 में विहिप के संयोजन में इस संघर्ष ने जन आंदोलन का भी रूप ले लिया। छह दिसंबर 1992 को ढांचा विध्वंस के बाद भी रामलला की रिहाई नहीं हो सकी।
रामलला एक छत तक को तरस गए। 27 वर्षों तक रामलला टेंट में धूप, सर्दी, गर्मी, बरसात सहते हुए विराजमान रहे। प्रभु की यह दशा हमेशा भक्तों को अखरती रही, मगर कानूनी बंदिशों के चलते वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते थे। उनके मन में बस रामलला की रिहाई का ही स्वप्न तैरता था। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद रामभक्तों की वर्षों पुरानी साध पूरी हुई। इसके कुछ ही महीनों बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने रामलला को टेंट से निकालकर अस्थायी मंदिर में विराजित कराया। ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि अब पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखकर रामभक्तों की चिर आंकाक्षा को तृप्त करने का काम किया है। यह रामनगरी के लिए एक नए युग का शुभारंभ है।

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